NATURE'S PARADISE - VALLEY OF FLOWERS | UNESCO WORLD HERITAGE SITE
Swati Rojha · 3,508 words · 18 min read · HI

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सो अभी मैं हूं वैली ऑफ़ फ्लावर्स में और ये यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में से एक साइट है। लेकिन मैं यहां पहुंची कैसे? चलो सबसे पहले वो जानते हैं विंड [संगीत] हैपन द ग्राउंड आई थिंक कम्स टू अराउंड मेरी गो मेरी गो मेरी गोरा मेरी मेरी मेरी मेरी मेरी गोरी गो मेरी गो मेरी गोरी
मेरी मेरी मेरी मेरी गो सो एस यूजुअल दिल्ली के ट्रैफिक में फर्स्ट बस के बस छूटने ही वाली थी। भाग-भाग के बस पकड़ी। सो गाइस। सो अभी सुबह के 5:00 बज रहे हैं और मैं हूं ऋषिकेश में। मतलब ऋषिकेश से थोड़ा सा पहले नेपाली फार्म नाम की जगह पे जो बसेस का स्टॉप होता है और मैं अपने ट्रैवलर का
वेट कर रही हूं। एंड अ सोलो ट्रैकिंग ट्रिप फाइनली। लेट्स सी मजा आने वाला है।
द [संगीत] डोर तो ट्रेवलर आ गई है अपनी और ये यहां से जाएगी गोविंद घाट तक लेट्स गोवर [संगीत] फील फ्री आई हो
फाइनली आई एम हियर गोविंद घाट। आज का पूरा दिन यहां ट्रेवलिंग में ही निकल गया। थक गई मैं। यह व्यू है मेरे रूम से एंड बिल्कुल ही मैं ब्रिज के पास रुकी हुई हूं। सामने अलकनंदा है। यहां से दिख नहीं रही है लेकिन मुझे आवाज उसकी प्रॉपर आ रही है एकदम। मेरे रूम का दरवाजा खोलते ही बाहर एक मिनी
वैली ऑफ़ फ्लावर है। और यह गोविंद घाट की अलकनंदा रिवर साइड है। और इस बार मैं पंछी को घर छोड़ के आई हूं। क्योंकि अगर मैं बाइक से आती तो ट्रैक करना और ज्यादा डिफिकल्ट हो जाता। [संगीत] रात में बारिश हुई थी लेकिन अभी देख रहे हो कितनी जोर से धूप खिली हुई है। और यह
गोविंद घाट का गुरुद्वारा है। आप यहां पे भी रुक सकते हो। यहां पे आप खाना खा सकते हो। उसके बाद यह ब्रिज क्रॉस करके रिवर के उस साइड जाना पड़ता है क्योंकि मेरे को अभी जाना है पुलना और पुलना के लिए लेनी पड़ेगी एक शेयर टैक्सी। तो ब्रिज के इस पार मैं पहुंच गई हूं। मैं
शेयर टैक्सी के चलने का वेट कर रही हूं और टैक्सी वाले बाकी पैसेंजर आने का वेट कर रहे हैं। और उसी दौरान मिलते हैं मुझे यह अंकल। इनका नाम है गुरख बहादुर थापा। और जैसे कि नाम से पता चल रहा है यह आए हैं नेपाल से। और यह हर साल 4 महीने इधर आते
हैं अपना रोजगार कमाने के लिए। आपकी टोकरी में वजन नहीं है? वजन है ना? मतलब टोकरी हटाके बैग बैग टांग लो। ठीक है ये भी लेना ही है ना? यह भी जाना ही है ऊपर। ये भी आप ही होता है ना। तो 30 32 कि.मी. का ट्रैक तो यह होगा ही। तो मैंने सोचा कि मेरी भी थोड़ी हेल्प हो
जाएगी। तो मेरा बैग यह लेके चलेंगे। सो अभी मैं पुलना पहुंच गई हूं और यह यहां पे भी आपको बाइक पार्किंग की जगह मिल जाएगी। वो दूर एक वॉटरफॉल दिख रहा है सुंदर सा। वाओ यार। एंड दिस इज पुलना। पुलना लास्ट मोटरेबल रोड है। मतलब आप अपनी अगर बाइक से आ रहे हो तो डायरेक्ट पुलना
तक आ सकते हो। अदरवाइज आपको गोविंद घाट से शेयर टैक्सी लेनी पड़ेगी। मैं और मेरे पिटू वाले भैया उसी से आए हैं। अब चलते हैं अपना ट्रैक स्टार्ट करते हैं। [संगीत]
[संगीत] ये ग्रीनरी देख रहे हो पत्थरों पे ऊपर देखो। वाओ ऐसी सुंदरता दिखती है मसून में अराउंड 1 कि.मी. हो गया है और जब आप स्टार्टिंग में चलना शुरू करते हो ना तो ज्यादा थकान हो जाती है। बट फिर एक बार जब पेस बन जाता है, मोमेंटम बन जाता है तो थोड़ा ठीक लगने लगता है।
[संगीत] काफ़ी स्टीप है। बहुत जगह-जगह ना। चढ़ाई भी बहुत स्टीप है और उतराई भी बहुत स्टीप है।
मैं और अंकल मस्त खाते हुए चल रहे हैं। [संगीत] घूमो घूमू मैं जहांजहां घूमूं झूमू झूमू आसमान को चूमो ये देखो पूरे रास्ते में पत्थर-पत्थर है ये शायद लैंडस्लाइड हो के आई है ऊपर से और मैंने धूप से बचने के लिए मेरा ये ये पहन लिया है इसको मुझे पता नहीं क्या बोलते हैं। यह मैंने चीनू से मांगा है।
चीनू मेरी छोटी बहन है। ये हुई है बहुत तगड़ी लैंडस्लाइड देख रहे हो साइड की रेलिंग भी टूट गई है उधर उतना रास्ता ठीक है और यहां से देखो रेलिंग भी टूट गई है पूरी भाई साहब वॉटरफॉल आ रहा है ऊपर से और झरने का पानी यहां से होते हुए जा रहा है नीचे
[संगीत] ओ भाई
योगेश्वर भाई डर के साइड हो गए। ये भी और वो भी। भाई साइड गए। बाय बाय बाय। बाय बाय बाय। तो ये दोनों आंटियां लुधियाना से आ रही हैं। और 70 प्लस एज है दोनों की और फिर भी आप देख रहे हो पैदल चल के ट्रैक कर रहे हैं। व्हाट्स योर एक्सक्यूज गाइस जो घोड़े
खच्चरों पे चल रहा है। व्हाट्स योर एक्सक्यूज?
मेरी नजर देखो किस पे पड़ी। ये मधुमक्खी के छत्ते हैं। इतने बड़े-बड़े। भाई साहब कितने सारे हैं। एक बार अगर किसी के पीछे लग गई ना ये सब तो वो नहीं बचने वाला। ये जो घांगरिया तक का ट्रैक है ना गोविंद घाट से लेके मतलब पुलना से लेके इसकी स्टार्टिंग और एंडिंग बड़ी पीसफुल
है। बीच में थोड़ा कस है। तो 4-प घंटे चलने के बाद मैं घांगरिया पहुंच चुकी हूं। यह अराउंड 11-12 कि.मी. का ट्रैक है। और जो मैंने देखा ना यार, मेरा भी मन कर गया यह देख के खेलने का। बट मौसम धीरे-धीरे खराब हो रहा है। तो सबसे पहले मैं स्टे ढूंढ लेती हूं।
[संगीत] आपको तो सब जानते हैं। बहन जी हैं। गांव से आया। इस बार लेट आए हो? हां, लेट आ गया। वरना कब आ जाते हो? हां, मिल गया। पहली बार आप मिल गया। अच्छा। बहुत बढ़िया हुआ। चलो मुझे भी आप मिल गए। बहुत बढ़िया हुआ। बढ़िया हुआ। फोटो अच्छी है। फोटो आपकी आ गई अच्छे से।
ठीक है। ठीक है। मेरे को याद करना है। मालिक साहब उसको अभी यहीं सोता हूं मैं उनके साथ। अच्छा। [संगीत] सो फाइनली आई हैव रीच्ड खांगरिया। यह कुछ रूम है मेरा। अभी टेंपरेचर है यहां पे 14° और मिनिमम टेंपरेचर रात में जाएगा 12° के आसपास। और अभी मैं हूं 397 मीटर की ऑल्टीट्यूड पे जो कि हो जाता है लगभग 1020
फीट और आज मैं आपको स्टेप्स दिखाती हूं मैंने कितने कदम चले ये देखो ऑलमोस्ट 24000 बहुत ज्यादा डिस्टेंस होता है पहाड़ पे स्टीप चढ़ना 17 कि.मी. इज अ लॉट और मेरे जैसे इंसान के लिए जो प्रो ट्रैकर नहीं है बहुत ज्यादा है। और अगले आने वाले तीन-चार दिन में मेरे को डेली अराउंड 10
कि.मी. मेरा एवरेज रहेगा। तो टायरिंग है लेकिन मैं एंजॉय कर रही हूं और यहां घांगरिया में भी ये एक गुरुद्वारा है जिसको गोविंद घाट के नाम से भी जानते हैं। तो आप लोग चाहो तो उधर भी स्टे कर सकते हो। इस वाले में शायद हॉल मिलता है खाली लेकिन जो नीचे गोविंद घाट पे मिलता है
उसमें आपको रूम्स भी मिल जाएंगे। वो आपको शायद प्री बुकिंग करानी पड़ती है। बंकर बेड भी मिल जाएंगे। हॉल भी मिल जाएगा। तो बहुत सारे ऑप्शंस हैं रहने के। और बाकी यार मेरे ड्रोन में थोड़ी सी दिक्कत हो गई है। इसका जो ये नीचे वाला सेंसर होता है ना इसका तार हिल गया है। पूरा निगल गया है
अंदर से। तो मैं ड्रोन नहीं उड़ा पा रही हूं। जब मैंने ट्रैक स्टार्ट किया पुलना से और मेरे को वो सुंदर सा वॉटरफॉल दिखा था ना तो मैंने फटाक से ड्रोन निकाला लेकिन सैडली वो उड़ ही नहीं पाया। टेक ऑफ परमिशन ही नहीं मिल रही इसको क्योंकि उसके सेंसर का तार ही निकल गया है। मैंने कॉल
करके पूछा एक स्टोर पे और मैंने अभी यहां पे भी ट्राई करा कि इसका जो मतलब यह नीचे वाला इसका ढक्कन खुल जाए। इस पे ना बहुत छोटा-छोटा स्क्रू है और मेरे पास यह इस साइज का स्क्रू ड्राइवर है लेकिन इससे भी काम नहीं बन पाया और छोटा स्क्रूड इधर मिला नहीं। तो इस बार मैं बहुत अलग तरीके
से ड्रोन शॉट्स लेने वाली थी लेकिन उड़ा ही नहीं पाऊंगी। एनीवेज अभी 9:12 हो गए हैं रात के और अभी काफी थक गई हूं मैं। तो मैं अभी नहा के सो रही हूं क्योंकि सुबह उठते ही मैं निकल जाऊंगी वैली ऑफ़ फ्लावर के लिए। वहां की सारी इंफॉर्मेशन हम आपको देंगे थोड़ी देर बाद। आई एम टायर्ड एंड
टाइम टू डू इट अगेन टुमारो। सो आज जाना है वैली ऑफ़ फ्लावर्स और सनस्क्रीन वगैरह मैंने सब लगा ली क्योंकि जब यहां पे धूप होती है ना ज्यादा ऑल्टीट्यूड पे धूप आपको ज्यादा अफेक्ट करती है। तो इसलिए मैंने सनस्क्रीन लगा ली है। और बाकी कल की थकान उतर गई है। थोड़ी बहुत बाकी आपको मेरे फेस
पे दिख रही होगी। आइज पफी पफी हो रखी हैं। बाकी लेट्स गो। मैं रेडी हूं। बस ब्रेकफास्ट करना है। उसके बाद लंच पैक करवाना है क्योंकि वैली ऑफ़ फ्लावर के रास्ते में आपको कुछ भी नहीं मिलेगा। कोई स्टॉल नहीं मिलेगा। तो इट इज़ ऑलवेज रिकमेंडेड कि आप अपना खाना पैक करवा के लेकर जाओ। वरना आप भूखे मर जाओगे।
[संगीत] तो ट्रैक स्टार्ट हो गया है। श्री हेमकुंड साहिब यहां से 6 कि.मी. है और स्टार्ट होते ही कुछ ऐसी चौड़ाई शुरू है एकदम से स्टीप। तो एक ये डायवर्जन आता है। ये जा रहा है श्री हेमकुंड साहिब की तरफ। और ये जा रहा है वैली ऑफ़ फ्लावर की तरफ। फ्लावर्स है। मेजर फ्लावर्स जो है यहां पे
मिलते हैं। बहुत सारे जंगली जानवर भी है इधर। स्नो लेपर्ड, रेड फॉक्स, मस्क डियर। वैली ऑफ़ फ्लावर में आपको आगे कुछ भी खाने पीने को नहीं मिलेगा। तो घांगरिया से ही ले लेना। इवन पानी भी और घांगरिया में भी थोड़ा महंगा मिलता है। लाइक यह पानी की बोतल मेरे को ₹50 की पड़ी है क्योंकि इतनी
ऊपर लाते हैं वो लोग। सो प्रॉपर फील आ रही है कि मैं नेशनल पार्क में चल के जा रही हूं। सुंदर है यार। तो आगे बोतल तो नहीं मिलेगी आपको बट पानी मिल जाएगा। मतलब ग्लेशियर से बहुत झरने बहते हैं रास्ते में। साफ पानी होता है बिल्कुल। 1982 में इसकी स्थापना हुई थी फूलों की
घाटी की और 2005 में इसको यूनेस्को साइड घोषित कर दिया गया था। ये फोन नंबर आपके बगल में लगे हुए। अच्छा नेटवर्क आता है आगे? हां Airtel Jio ओके। ये नंबर आपका Airtel Jio में हां Airtel है। [संगीत] वर्ल्ड हेरिटेज साइट Pro। [संगीत] तो जहां से वो डायवर्जन आता है उसके अराउंड 100 मीटर बाद आपको एक चेक पॉइंट
मिलेगा। जहां पर आपको एक ₹200 की पर्ची कटवानी पड़ेगी। और यहां वैली ऑफ़ फ्लावर में लास्ट एंट्री 12:00 बजे के बाद आपको नहीं करने देते। क्योंकि आपको 5:00 बजे यहां वापस आना होता है। चेक पोस्ट पे रिपोर्ट करना होता है। सो, आप जितना जल्दी जाओगे, उतना बेटर है। अब उतना अच्छा, आप उतना
ज्यादा एक्सप्लोर कर पाओगे। और अगर आपको सेम डे वापस नीचे जाना है तो इट्स बेटर कि सुबह 6:00 बजे ही निकल जाओ। वैली ऑफ़ फ्लावर भी हो जाएगा और टाइम से आप नीचे भी पहुंच जाओगे। बाकी बादल बहुत है। पता नहीं आगे वो व्यू दिखेगा या नहीं दिखेगा रिवर वाला। लेट्स सी [संगीत]
द [संगीत] शुड रन वे रन माय वे फ ह [संगीत]
तो अभी मेरे बैग में ड्रोन नहीं है। ड्रोन मैं अपने रूम पे ही रख के आई हूं क्योंकि यह नो ड्रोन ज़ोन है। यहां पे ड्रोन फ्लाई करना अलाउड नहीं है। इधर एक ग्रेव भी है जो 4.5 कि.मी. बाद आएगी। और जो रिवर तक जाने की बात मैं कर रही थी वो है 5.5
कि.मी. वो है पुष्पापति रिवर। थोड़े-थोड़े फ्लावर अभी से दिखने शुरू हो गए हैं भाई। [संगीत] तो इस वैली में एक तो ड्रोन अलाउड नहीं है। दूसरा लाउडस्कर अलाउड नहीं है और प्लास्टिक अलाउड नहीं है। आपका बैक चेक होता है वो चेक पॉइंट पे। बट जब आपको इतनी प्यारी इंसेक्ट्स की आवाज आ रही हो,
बॉर्ड्स की आवाज आ रही हो और बगल में रिवर बह रही है उसकी आवाज आ रही हो तो आई थिंक गाना सुनने की नीड ही नहीं है। ये म्यूजिक से कम नहीं है भाई जो मैं अभी सुन रही हूं। और प्रॉपर वो वाली फील आ रही है। वो इंटू द वुड्स वाली फील नहीं होती।
और दो दिन से ना डेली रात में बारिश हो रही है। लेकिन दिन में मैं बच जा रही हूं भाई। [संगीत] वेटिंग ऑन
लेट मी गो। [संगीत]
हाईवे ले विल अबाउट दिस डे आई वा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आई डोंट नो व्हेन आई कैन डियर शुड स्टे आई डोंट वावर मी [संगीत] [प्रशंसा] ये सारे पेड़ देखो एक जैसे हैं। ठीक है? और एक ये पेड़ देखो सबसे डिफरेंट। वाओ। मतलब बीच-बीच में हैं ऐसे एकद करके। देख रहे हो? कभी कबभार आप यूनिक होते हो लेकिन
आप एग्जिस्ट कर सकते हो सबके बीच आराम से। थोड़ा सा एडजस्ट करना पड़ता है। बट आप यू कैन फिट इन एवरीवेयर। फुल बादल हो गए हैं। पूरे-पूरे चांसेस हैं बारिश होने के। ड्रिजलिंग शुरू हो गई है। ये वाला पत्ता देखो। एक साइड से कैसा कलर है और एक साइड से कैसा कलर है। सुंदर लग रहा है। पूरी
ड्रॉपलेट्स आ गई हैं इस पे। क्योंकि ट्रिज़लिंग शुरू हो गई है। मौसम देखो एक बार। कुछ भी नहीं दिख रहा है। लिटरली कुछ भी नहीं दिख रहा है। वैली का व्यू ही नहीं आ रहा है। आगे जाके आई थिंक अच्छा मैं पहुंच जाऊंगी फाइनली। कुछ भी नहीं दिखेगा। ये शायद किसी का अंडा है। फूट गया है। अभी
मैं पहुंची नहीं हूं एंड पे। और फ्लावर्स ऑलरेडी देखो कितने सारे हैं। मतलब थोड़े-थोड़े तो स्टार्टिंग से ही दिख रहे हैं। और मैंने छाता भी ले लिया है क्योंकि थोड़ी ज्यादा तेज ड्रिजलिंग हो रही थी बीच में और मेरा बैग भी गया था। [संगीत]
[संगीत] सो वैली ऑफ़ फ्लावर फवर स्टार्ट हो गई है और जितनी दूर तक मेरी नजर जा रही है फ्लावर्स से ही फ्लावर्स है। वेरी ब्यूटीफुल। वाओ ये वाला फ्लावर बहुत है यहां पे। ये कौन सा है? सो अभी इतना मिस्टी हो गया है सब कुछ कि कुछ दिख ही नहीं रहा है। ऑलदो यह वैली
कवर्ड रहती है नंदा देवी पीक से बट नॉट विज़िबल। कुछ भी विज़िबल नहीं है भाई। हिमालय जो रेंज है वह अराउंड 2400 कि.मी. लंबी है और नंदा देवी सेकंड हाईएस्ट पीक है हिमालय की। पहली है कंचनजंगा। बट कुछ भी विज़िबल नहीं है। और नंदा देवी के जस्ट बगल में ही त्रिशूल पर्वत भी है।
इधर हनुमान पर्वत भी है। जहां से हनुमान जी संजीवनी बूटी लेके गए थे उठा के। अभी 1:30 बज गया है। और इट इज़ रेकमेंडेड कि आप 1:00 बजे ही वापस आना शुरू कर दो उधर से। तो व्यू तो कुछ दिख नहीं रहा है। तो कुछ फायदा है नहीं आई गेस। बैड लक। यहां पर एक फ्लावर है ब्रह्मा
कमल। वो उत्तराखंड का नेशनल फ्लावर है। मुझे तो नहीं दिखा यार। सो इस वैली की डिस्कवरी हुई थी 1931 में। एक फ्रैंक एस स्मिथ नाम का बंदा था। मतलब अपने ग्रुप के साथ ही केम कैमेट नाम की एक पीक है हिमालय की ही। वहां पे वो लोग उसका सबमिट करने गए थे। और जब वह वापस उतरने लग गए ना तो जैसा
मौसम अभी है वैसा ही मौसम तब खराब हो गया था। तो तब भी मौसम खराब हो गया था और वो नीचे उतरते-उतरते खो गए और जब वो इस वैली में आकर उन्होंने देखा कि वाओ इतने सारे फ्लावर्स हैं तब जाके इस वैली का पता चला इसलिए इसको एक्सीडेंटल डिस्कवरी बोलते हैं। तो इस तरीके से यहां की जो डिस्कवरी
है वो गलती से हो गई थी। बट अच्छा हुआ हो गई यार कितनी सुंदर है। मैं मतलब अभी व्यू इतना अच्छा मैं ले नहीं पा रही हूं। लेकिन ऐसी जगहों पे जब आती हूं ना और जो व्यू चाहिए होता है वो नहीं मिलता है। अब जैसे मैं तुंगनाथ गई थी लेकिन मैं चंद्रशिला
नहीं जा पाई क्योंकि ऐसा ही मौसम था तो जो प्रॉपर ब्यूटी होती है वह दिख नहीं पाती तो फिर शायद यह इन प्लेसेस का प्लान होता है मुझे दोबारा बुलाने का तो अब व्यू नहीं दिखेगा तो यार दोबारा तो आना पड़ेगा ना फिर 1937 में वो वापस आए वैली ऑफ़ फ्लावर का ट्रैक करने के लिए और इस बार उनके साथ
चार तिब्बत के लोग थे और मजे की बात यह है कि वो बोटेनिस्ट भी थे। तो मतलब कितना बड़ा कोइंसिडेंस है यह कि जिस बंदे ने एक्सीडेंटल डिस्कवरी करी वैली ऑफ फ्लावर की वो खुद में वोटनी का बहुत बड़ा महाशय है। उसके बाद 1938 में लिखी गई एक किताब एक नवेल एक बुक जिसका नाम है वैली ऑफ़
फ्लावर। अभी पूरा फॉगी फॉगी है। मैं कहीं ना इधर-उधर भटक जाऊं। मैं अपना सही सलामत पहुंच जाऊं नीचे बेस पे। कास्टेंट बारिश हो रही है। एक चीज मुझे समझ आ गई कि अगर आप ऐसी किसी जगह पे जा रहे हो ना जहां पे आपको व्यूज एंजॉय करने हैं। फुल मतलब वहां की ब्यूटी आपको पूरा 100% तक एंजॉय करनी
है। उससे पहले यह देखो मेरे पीछे एक केव है। यहां पे बारिश से छुपा जा सकता है। लेकिन उधर बैठने का फायदा नहीं है। बारिश रुकने नहीं वाली और 5:00 बजे से पहले नीचे पहुंचना है। तो ऐसी जगह पर आने का बेस्ट टाइम है सेप्टेंबर क्योंकि जून जुलाई में बारिश होती है उससे पहले व्यू इतना ग्रीन
नहीं होता अगस्त में भी रुक-रुक के बारिश होती रहती है बट सेप्टेंबर में बारिश मिलने के बहुत कम चांसेस हैं और मसून के कारण ग्रीनरी तो फुल अपना पीक पे होती है बिल्कुल लश ग्रीन व्यूज कम बारिश ना के बराबर बारिश और व्यूज ही व्यूज अभी देखो यहां से पूरी नदी जा रही है लेकिन मैं देख
नहीं पा रही मतलब हल्की-हल्की दिख रही है और कैमरा में तो बिल्कुल भी नहीं दिख रही होगी मेरे हिसाब से। तो यह थोड़ा सा डिसएडवांटेज है बारिश में आने का। मुझे लगा था कि बारिश अभी कम हो गई है तो शायद मेरे को व्यूज दिख जाए बट नहीं दिखे। अभी क्या रात में बारिश हुई थी तो उस बारिश के
कारण पूरा मिस्ट बन जाता है। ठीक है? फिर मिस्ट बन जाती है तो बादल ऐसे पूरे फैल जाते हैं। तो ना तो वैली का व्यू दिख रहा है ना माउंटेंस दिख रहे हैं कुछ भी नहीं दिख रहा है। [संगीत] [संगीत] [संगीत]
[संगीत] [संगीत]
बहुत ठंडा पानी है। सारे ऑर्गन्स रिपे हुए हैं अंदर। बस रास्ता आप देख लो कि कुछ ऐसा ट्रैक है यहां का। मतलब टफ है थोड़ा। मॉडरेट लेवल का है। यह पहला मेरा ऑफिशियल ट्रैक है वैली ऑफ़ फ्लावर। वो स्नो है क्या? स्नो जमी हुई है नीचे। मतलब मैं इतनी ठंड में खड़ी हूं। क्रेजी
यहां पर भी एक केव टाइप कुछ बनी हुई है। ये इस बड़े पत्थर की वजह से देख रहे हो इसने ये पूरा कवर कर रखा है। और मौसम और ज्यादा खराब होता जा रहा है। जल्दी पहुंचना पड़ेगा नीचे। ये पेड़ ने पूरी रास्ता बनाया हुआ है। पूरा मिस्त ही मिस है। कुछ व्यू नहीं आ
रहा भाई।
हवा हवा हवाओं में बहा दे समय मेरा यहीं पे ठहरा दे कहीं तो कोई मिले जो मुझे मुझसे मिला दे। यहां हो तो जहां की नाफिक्र है मेरा तो साथ देने को सफर है। फर्क पड़ता है क्या? अभी कौन सी पर है मंजिलें मेरी है जरूरी नहीं ये रास्ता मेरा ये मेरा ही घर अब लगने लगा है यूं ले
चल मुझे जहां मैं मैं नहीं मैं उतर चुकी हूं और इधर जहां पे एंट्री होती है वहां पे को वापस आते टाइम अपना नाम क्रॉस भी करवाना पड़ता है। हाजिरी लगानी पड़ती है कि आप वापस आ चुके हो। और मैं रास्ते में गिर गई यार। मेरा पैर फिसल गया पत्थर पे। बारिश में सब कुछ बड़ा
स्लिपरी हो गया था। [संगीत] [संगीत] मैं लिटरली दो दिन से वेट कर रही हूं और दो दिन से लगातार बारिश हो रही है। मुझे श्री हेमकुंड साहिब भी जाना था। बट बट इतनी बारिश हो रही है कि यही नहीं पता कि बंद कब होगी। तो मैंने वापस नीचे जाना ही ठीक समझा और बारिश के कारण सारे झरने चल
गए हैं। ये झरने पहले नहीं दिखे थे मेरे को जब मैं ऊपर आई थी। और इतनी हैवी रेन के चलते लोग ट्रैक पे आ भी नहीं रहे हैं। अभी बहुत कम भीड़ है यहां पे। और इवन रास्ते में वाटर क्रॉसिंग्स भी बन गई है। और यह बहुत तगड़ा वाला फ्लो है लिटरली। और आज लाइफ में पहली बार पत्थर गिरते भी
देख लिए भाई। मतलब मैं रिकॉर्ड नहीं कर पाई। लेकिन ऐसा जैसे बिजली कड़कती है ना बड़ी जोर से ऐसी आवाज आई थी। बहुत डर लगा। तो वापस जाना ही बेस्ट डिसीजन है मेरे हिसाब से। जब नेक्स्ट टाइम आऊंगी तो साथ-साथ कारगुंडी लेक भी करके जाऊंगी। ऐसी आवाज आई जैसे बिजली नहीं खड़कती है।
बिल्कुल ही। ऐसी आवाज आई। खाना ही था ना? हम वाले टाइम नहीं था नहीं था ना अभी हो गया इतनी बारिश हो रही है दो-तीन दिन से [संगीत] हां ये बारिश के कारण ही बह रहा है पूरा [संगीत]
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